मैगी देर से बनाना आदत बन गया
देर से बनती मैगी और देर से आती इंसान, और हर साल दोहराई जाने वाली एक चौहान्दी।
Lambi shayari — thoda kahane jaisa, detail ke saath.
छह या उससे ज़्यादा पंक्तियों वाली लंबी शायरी।
12 entries in this collection
देर से बनती मैगी और देर से आती इंसान, और हर साल दोहराई जाने वाली एक चौहान्दी।
अकेले होने को बुरा न मानने की सोच, और रात की यादों से निपटने का अपना तरीक़ा।
कॉफ़ी की दुकान, छत की बारिश और भीगते हुए साथ बिताए मिनटों का एक पूरा दृश्य।
हवा और रात के सजावट से किसी के बारे में कहा गया, और थकान अचानक ग़ायब होने का एहसास।
किसी दोस्त की चुप्पी और डाँट, और दोस्ती में इज़्ज़त की जगह बाक़ी सब माफ़ होने का भाव।