Dard

चुप्पी रहने में ही टूट जाता हूँ

लेखक: Shayari Mirchi Editorial 👁 26

चुप रहने में ही टूट जाता हूँ,
यह बात मैंने किसी को नहीं कही।
लोग कहते हैं, बोलो, आज़ाद रहोगे,
मैं बोलता हूँ और फिर चुप हो जाता हूँ।

कभी सोचता हूँ, यह कमज़ोरी है,
और कभी सोचता हूँ, यही इंसानियत है।
बीच में मैं हूँ, और कोई फ़ैसला नहीं।

चुप रहकर टूटने की आदत और उस पर लोगों के सलाह और आपस का असमंजस्य।

Shayari Mirchi Editorial

265 published entries

Shayari Mirchi की एडिटोरियल टीम। यहाँ लिखी गई शायरी, क्वोट और कैप्शन इसी साइट के लिए लिखे गए हैं।

View all

और Dard शायरी पढ़ें

टिप्पणी लिखिए

Your email address will not be published. Required fields are marked *

आपका ईमेल पता किसी के साथ साझा नहीं किया जाएगा।