Emotional

मैगी देर से बनाना आदत बन गया

लेखक: Shayari Mirchi Editorial 👁 3
मैगी देर से बनती है, तू देर से आती है,
मैं रोज़ बर्तन जोड़ता हूँ, ख़ुद को समझाता हूँ।
तूने कहा था, ख़ुदा देखेगा इंतज़ार का,
मैंने गिने साल, हर साल वही सी चौहान्दी।

आज भी मेज़ पर दो कटोरी हैं, एक ही रस्सी से बंधी,
एक कटोरी सूखी रहती है, फिर भी मैं धोता हूँ।
लोग कहते हैं, ज़िंदगी में हर चीज़ मिलती है,
मैं कहता हूँ, कुछ चीज़ें बस टाइम पर नहीं मिलतीं।
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देर से बनती मैगी और देर से आती इंसान, और हर साल दोहराई जाने वाली एक चौहान्दी।

Shayari Mirchi Editorial

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Shayari Mirchi की एडिटोरियल टीम। यहाँ लिखी गई शायरी, क्वोट और कैप्शन इसी साइट के लिए लिखे गए हैं।

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