Barish

बारिश की तरह बहता ये दर्द

लेखक: Shayari Mirchi Editorial 👁 4
यह दर्द बारिश की तरह बहता है,
जहाँ भी ज़मीन मिले, रुक जाता है।
फिर ज़ोर से आता है, मगर धीमे,
जैसे कोई जाने कि कब रुक जाएगा।
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बारिश की आदत से मिलता दर्द, जो कहीं ज़मीन मिलते ही रुक जाता है।

Shayari Mirchi Editorial

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Shayari Mirchi की एडिटोरियल टीम। यहाँ लिखी गई शायरी, क्वोट और कैप्शन इसी साइट के लिए लिखे गए हैं।

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