Barish Shayari
Baan aur mausam dono ka ehsaas — barish par likhi shayari.
बारिश, भीगन और मौसम से जुड़ी शायरी।
11 entries in this collection
कुर्सी पर बैठकर तुझसे बात करना
कॉफ़ी की दुकान की कुर्सी ख़ाली मिल जाए,
तो कुछ नहीं, बस तेरी याद आ जाए।
बारिश हो तो छत पर कॉल कर लेता हूँ,
बिना छत के क्या बात करूँगा, भाग जाएगी तू।
हम लोग ज़िंदगी भर बारिश का इंतज़ार करते हैं,
और जब आती है तो भीगना किसी के साथ होता है।
मैं भीगता हूँ, पर तेरी छत नहीं मिलती, ये सच है।
तो कुछ नहीं, बस तेरी याद आ जाए।
बारिश हो तो छत पर कॉल कर लेता हूँ,
बिना छत के क्या बात करूँगा, भाग जाएगी तू।
हम लोग ज़िंदगी भर बारिश का इंतज़ार करते हैं,
और जब आती है तो भीगना किसी के साथ होता है।
मैं भीगता हूँ, पर तेरी छत नहीं मिलती, ये सच है।
भीगी पत्तियाँ भी तुझे ढूँढ़ती हैं
भीगी पत्तियाँ भी तुझे ढूँढ़ती हैं,
रास्ते भर की ठंडी हवाएँ भी।
बारिश सिर्फ़ पानी नहीं लाती,
उसके साथ तेरा नाम भी धो देती है।
रास्ते भर की ठंडी हवाएँ भी।
बारिश सिर्फ़ पानी नहीं लाती,
उसके साथ तेरा नाम भी धो देती है।
बारिश की तरह बहता ये दर्द
यह दर्द बारिश की तरह बहता है,
जहाँ भी ज़मीन मिले, रुक जाता है।
फिर ज़ोर से आता है, मगर धीमे,
जैसे कोई जाने कि कब रुक जाएगा।
जहाँ भी ज़मीन मिले, रुक जाता है।
फिर ज़ोर से आता है, मगर धीमे,
जैसे कोई जाने कि कब रुक जाएगा।
बारिश का दिन है आज भी
बारिश का दिन है आज भी, छाता उठा ले,
गीले रास्ते कभी अजनबी से जान पहचान बन जाते हैं।
चाय की भाप कोने में चढ़ रही है,
और भीगी सड़क पर नए क़दम गिने जा रहे हैं।
गीले रास्ते कभी अजनबी से जान पहचान बन जाते हैं।
चाय की भाप कोने में चढ़ रही है,
और भीगी सड़क पर नए क़दम गिने जा रहे हैं।
त्योहार पर लोग भूल जाते हैं
त्योहार पर लोग भूल जाते हैं,
कि दिन किसी के नहीं, किसी महीने के हैं।
भूल जाते हैं, कि ये दिन बनाया किसने,
सितंबर की उमस, सितंबर की धूप, ये सब याद है।
कि दिन किसी के नहीं, किसी महीने के हैं।
भूल जाते हैं, कि ये दिन बनाया किसने,
सितंबर की उमस, सितंबर की धूप, ये सब याद है।