Zindagi Shayari
Zindagi, waqt aur khud se sawaalon par likhi shayari.
ज़िंदगी, समय और खुद से सवालों पर शायरी।
29 entries in this collection
अपनी जगह का रक़म
अपनी जगह का रक़म लेकर जाता हूँ,
किसी की ज़मीन पर बैठकर नहीं रहता।
जो लोग मेरी जगह ले लेते हैं,
उन्हें दर्द तो होता है, पर सोचते ग़लत हैं।
किसी की ज़मीन पर बैठकर नहीं रहता।
जो लोग मेरी जगह ले लेते हैं,
उन्हें दर्द तो होता है, पर सोचते ग़लत हैं।
जिस दिन आवाज़ मिलेगी, उस दिन
जिस दिन आवाज़ मिलेगी, उस दिन मैं सुनूँगा,
आज तक सिर्फ़ ख़ामोशी मिली है।
लोग कहते हैं, समय आने पर सब होता है,
मैं कहता हूँ, समय नहीं, इरादा चाहिए।
आज तक सिर्फ़ ख़ामोशी मिली है।
लोग कहते हैं, समय आने पर सब होता है,
मैं कहता हूँ, समय नहीं, इरादा चाहिए।
ज़िंदगी ने सब दिया, दर्द एक्स्ट्रा
ज़िंदगी ने सब कुछ दिया मुझे,
और दर्द अलग से भेज दिया।
ख़ुशियाँ चुनी ही नहीं मुझे, दर्द ने
स्वयं चुन लिया, और साथ में ले आया।
और दर्द अलग से भेज दिया।
ख़ुशियाँ चुनी ही नहीं मुझे, दर्द ने
स्वयं चुन लिया, और साथ में ले आया।
गद्दे की कुर्सी रेशमी नहीं होती
गद्दे की कुर्सी रेशमी नहीं होती,
और दोस्ती महँगी नहीं, बस वक़्त लेती है।
और दोस्ती महँगी नहीं, बस वक़्त लेती है।
तीसरी उम्र का सब्द
तीसरी उम्र का सब्द है, अब तय कर ले,
या तो मुस्कुराना है, या भाग जाना।
जो लोग कहते हैं, उम्र बढ़ी तो ख़त्म हुए,
उनकी गिनती मेरे दिन गिनने से पहले है।
या तो मुस्कुराना है, या भाग जाना।
जो लोग कहते हैं, उम्र बढ़ी तो ख़त्म हुए,
उनकी गिनती मेरे दिन गिनने से पहले है।
नई सुबह का पहला क़दम
नई सुबह का पहला क़दम अजीब होता है,
एक गहरी साँस, फिर एक लंबी सोच।
रात भर जो सोचा था, सुबह सब छोटा हो जाता है,
और छोटा सा काम शुरू कर देना सबसे अच्छा इलाज़ है।
एक गहरी साँस, फिर एक लंबी सोच।
रात भर जो सोचा था, सुबह सब छोटा हो जाता है,
और छोटा सा काम शुरू कर देना सबसे अच्छा इलाज़ है।
चाँद को सलाम, नींद नहीं आती
चाँद को सलाम, नींद नहीं आती,
रोज़ यही सोचता हूँ, कल से क्या करूँगा।
बोर होकर किताब उठाता हूँ, पन्ना पलटता हूँ,
और सपना बन जाता है, और सपना आ जाता है।
रोज़ यही सोचता हूँ, कल से क्या करूँगा।
बोर होकर किताब उठाता हूँ, पन्ना पलटता हूँ,
और सपना बन जाता है, और सपना आ जाता है।
देश का दीवाना मैं हूँ
बचपन से कुछ ऐसा दिल में बैठ गया,
कि ये धरती हमारी है, और हम इसके।
मैं इसे कहूँगा, मेरा रिश्ता, इसे कहूँगा, मेरी ज़मीन,
यही सपना है, और यही सच भी है।
कभी सोचता हूँ, आज क्या बेहतर करूँ,
एक छोटा सा काम, बस अपने चारों ओर से,
जो टूटा है उसे जोड़ूँ, जो बिखरा है उसे सँभालूँ,
यही असली देश-भक्ति है, इससे आगे कुछ नहीं है।
कि ये धरती हमारी है, और हम इसके।
मैं इसे कहूँगा, मेरा रिश्ता, इसे कहूँगा, मेरी ज़मीन,
यही सपना है, और यही सच भी है।
कभी सोचता हूँ, आज क्या बेहतर करूँ,
एक छोटा सा काम, बस अपने चारों ओर से,
जो टूटा है उसे जोड़ूँ, जो बिखरा है उसे सँभालूँ,
यही असली देश-भक्ति है, इससे आगे कुछ नहीं है।
ज़िंदगी का रास्ता बनाओ
ज़िंदगी का रास्ता बनाने का नाम भी सुन लिया करो,
हाँ, हाथ से मिट्टी मिट्टी करते हुए।
ज़िंदगी टेढ़ी है, कोई मोड़ नहीं होता,
तो तय कर ले, फिर वहाँ से कहाँ निकलना है।
हाँ, हाथ से मिट्टी मिट्टी करते हुए।
ज़िंदगी टेढ़ी है, कोई मोड़ नहीं होता,
तो तय कर ले, फिर वहाँ से कहाँ निकलना है।
माँ के साथ बैठे बचते हैं
माँ के साथ बैठे बचते हैं,
और ख़ुद गढ़ने की ताक़त देती है।
हर मुश्किल में वो चुप रहती है,
पर कभी चुप नहीं होती।
मैं बड़ा हुआ, पर अब भी जब थकता हूँ,
तो सोचता हूँ, माँ की गोद आ जाए, कितना अच्छा होगा।
वो जगह आज भी है, बस उम्र बदल गई है।
और ख़ुद गढ़ने की ताक़त देती है।
हर मुश्किल में वो चुप रहती है,
पर कभी चुप नहीं होती।
मैं बड़ा हुआ, पर अब भी जब थकता हूँ,
तो सोचता हूँ, माँ की गोद आ जाए, कितना अच्छा होगा।
वो जगह आज भी है, बस उम्र बदल गई है।