Desh Bhakti Shayari
Watan aur apni mitti ke liye — desh bhakti par likhi shayari.
देश, माटी और तिरंगे से जुड़ी शायरी।
6 entries in this collection
देश का दीवाना मैं हूँ
बचपन से कुछ ऐसा दिल में बैठ गया,
कि ये धरती हमारी है, और हम इसके।
मैं इसे कहूँगा, मेरा रिश्ता, इसे कहूँगा, मेरी ज़मीन,
यही सपना है, और यही सच भी है।
कभी सोचता हूँ, आज क्या बेहतर करूँ,
एक छोटा सा काम, बस अपने चारों ओर से,
जो टूटा है उसे जोड़ूँ, जो बिखरा है उसे सँभालूँ,
यही असली देश-भक्ति है, इससे आगे कुछ नहीं है।
कि ये धरती हमारी है, और हम इसके।
मैं इसे कहूँगा, मेरा रिश्ता, इसे कहूँगा, मेरी ज़मीन,
यही सपना है, और यही सच भी है।
कभी सोचता हूँ, आज क्या बेहतर करूँ,
एक छोटा सा काम, बस अपने चारों ओर से,
जो टूटा है उसे जोड़ूँ, जो बिखरा है उसे सँभालूँ,
यही असली देश-भक्ति है, इससे आगे कुछ नहीं है।
त्योहार पर लोग भूल जाते हैं
त्योहार पर लोग भूल जाते हैं,
कि दिन किसी के नहीं, किसी महीने के हैं।
भूल जाते हैं, कि ये दिन बनाया किसने,
सितंबर की उमस, सितंबर की धूप, ये सब याद है।
कि दिन किसी के नहीं, किसी महीने के हैं।
भूल जाते हैं, कि ये दिन बनाया किसने,
सितंबर की उमस, सितंबर की धूप, ये सब याद है।
माँ का पालना और देश का पालना
माँ का पालना और देश का पालना एक जैसा है,
दोनों में कभी कोई नहीं पूछता।
जो माँ जिस दिन हाथ छोड़ती है,
उस दिन देश भी साथ में खड़ा रहता है।
दोनों में कभी कोई नहीं पूछता।
जो माँ जिस दिन हाथ छोड़ती है,
उस दिन देश भी साथ में खड़ा रहता है।
अकेले में देश का घोड़ा
अकेले में देश का घोड़ा भी अकेला चलता है,
पर उसकी हवा में लोगों की आवाज़ें रहती हैं।
पर उसकी हवा में लोगों की आवाज़ें रहती हैं।