तीसरी उम्र का सब्द
तीसरी उम्र का सब्द है, अब तय कर ले,
या तो मुस्कुराना है, या भाग जाना।
जो लोग कहते हैं, उम्र बढ़ी तो ख़त्म हुए,
उनकी गिनती मेरे दिन गिनने से पहले है।
या तो मुस्कुराना है, या भाग जाना।
जो लोग कहते हैं, उम्र बढ़ी तो ख़त्म हुए,
उनकी गिनती मेरे दिन गिनने से पहले है।
उम्र के एक पड़ाव पर ख़ुद को तय करने की बात, और आम सलाह पर व्यंग्य।