Zindagi Shayari

Zindagi, waqt aur khud se sawaalon par likhi shayari.

ज़िंदगी, समय और खुद से सवालों पर शायरी।

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देश का दीवाना मैं हूँ

बचपन से कुछ ऐसा दिल में बैठ गया,
कि ये धरती हमारी है, और हम इसके।
मैं इसे कहूँगा, मेरा रिश्ता, इसे कहूँगा, मेरी ज़मीन,
यही सपना है, और यही सच भी है।

कभी सोचता हूँ, आज क्या बेहतर करूँ,
एक छोटा सा काम, बस अपने चारों ओर से,
जो टूटा है उसे जोड़ूँ, जो बिखरा है उसे सँभालूँ,
यही असली देश-भक्ति है, इससे आगे कुछ नहीं है।
Maa Long

माँ के साथ बैठे बचते हैं

माँ के साथ बैठे बचते हैं,
और ख़ुद गढ़ने की ताक़त देती है।
हर मुश्किल में वो चुप रहती है,
पर कभी चुप नहीं होती।

मैं बड़ा हुआ, पर अब भी जब थकता हूँ,
तो सोचता हूँ, माँ की गोद आ जाए, कितना अच्छा होगा।
वो जगह आज भी है, बस उम्र बदल गई है।