तीर चटक ने दिल में लिखा
तीर चटक ने दिल में लिख दिया,
कि कुछ बातें कही ही नहीं जातीं।
और मैं चलता रहा उसी शाम,
जैसे कोई बुझा हुआ दीपक।
चुप रहने की एक आदत, और उस शाम का इंसान जो जलते हुए दीपक जैसा था।
तीर चटक ने दिल में लिख दिया,
कि कुछ बातें कही ही नहीं जातीं।
और मैं चलता रहा उसी शाम,
जैसे कोई बुझा हुआ दीपक।
चुप रहने की एक आदत, और उस शाम का इंसान जो जलते हुए दीपक जैसा था।