Lonely Shayari
Tanhai aur akela ehsaas — jab koi saath na ho.
अकेले रहने और तन्हाई की शायरी। जब कोई नहीं है और सन्नाटा ही साथी बन जाए।
33 entries in this collection
हज़ार लोगों के बीच मेरी कुर्सी
हज़ार लोग बैठे हैं, कुर्सी सिर्फ़ एक है,
मैं वही हूँ जो गिना नहीं गया।
मैं वही हूँ जो गिना नहीं गया।
आज रात में तुझे मिस करता हूँ
आज रात में तुझे मिस करता हूँ,
जबकि तू कहीं जाने का कोई इरादा नहीं करती।
यही शर्म है, मेरी कमी नहीं तेरी है,
इसलिए मैं लेटा हूँ, बस जागना नहीं है।
जबकि तू कहीं जाने का कोई इरादा नहीं करती।
यही शर्म है, मेरी कमी नहीं तेरी है,
इसलिए मैं लेटा हूँ, बस जागना नहीं है।
जिस दर्द को कहना नहीं जाता
जिस दर्द को कहना नहीं जाता, वो सबसे भारी होता है,
क्योंकि उसे सहलाने वाला कोई नहीं होता।
मैं रात को छत पर जाता हूँ, हवा से बात करता हूँ,
पर हवा भी जल्दी हट जाती है, ये भी सच है।
कभी-कभी सोचता हूँ, बोल दूँ किसी से,
मगर सुनने वाला कोढ़ा और देता है।
तो यही दर्द है, किसी को कहना नहीं जाता।
क्योंकि उसे सहलाने वाला कोई नहीं होता।
मैं रात को छत पर जाता हूँ, हवा से बात करता हूँ,
पर हवा भी जल्दी हट जाती है, ये भी सच है।
कभी-कभी सोचता हूँ, बोल दूँ किसी से,
मगर सुनने वाला कोढ़ा और देता है।
तो यही दर्द है, किसी को कहना नहीं जाता।
तीर चटक ने दिल में लिखा
तीर चटक ने दिल में लिख दिया,
कि कुछ बातें कही ही नहीं जातीं।
और मैं चलता रहा उसी शाम,
जैसे कोई बुझा हुआ दीपक।
कि कुछ बातें कही ही नहीं जातीं।
और मैं चलता रहा उसी शाम,
जैसे कोई बुझा हुआ दीपक।