Emotional Shayari
Bhavnata aur ehsaas se bhara mood — jab dil bhar na aaye.
भावना से भरी शायरी जहाँ एहसास गहरा हो।
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आज रात में तुझे मिस करता हूँ
आज रात में तुझे मिस करता हूँ,
जबकि तू कहीं जाने का कोई इरादा नहीं करती।
यही शर्म है, मेरी कमी नहीं तेरी है,
इसलिए मैं लेटा हूँ, बस जागना नहीं है।
जबकि तू कहीं जाने का कोई इरादा नहीं करती।
यही शर्म है, मेरी कमी नहीं तेरी है,
इसलिए मैं लेटा हूँ, बस जागना नहीं है।
बारिश में भीगी हुई यादें
बारिश में यादें भीग जाती हैं,
और फिर भी कहीं गिरती नहीं।
मैं भीगता हूँ, मेरा छाता ख़त्म हो चुका है,
और तू कहीं बहुत दूर किसी और छाँटी में है।
आज बारिश ने फिर वो दिन दोहराया,
जिस दिन मैंने तुझे रोकने की हिम्मत नहीं की थी।
आज भीगता हूँ, पर तारीख़ उसमें खोई हुई है।
और फिर भी कहीं गिरती नहीं।
मैं भीगता हूँ, मेरा छाता ख़त्म हो चुका है,
और तू कहीं बहुत दूर किसी और छाँटी में है।
आज बारिश ने फिर वो दिन दोहराया,
जिस दिन मैंने तुझे रोकने की हिम्मत नहीं की थी।
आज भीगता हूँ, पर तारीख़ उसमें खोई हुई है।
कि कुछ कहना बचा नहीं
जो दिल में है, वो मैं कहता हूँ क्या,
जो कहता हूँ, वो दिल में रहता नहीं।
और जो रहता है, उसे कोई सुनता नहीं,
और जो सुनता है, वो मुस्कुरा देता है।
जो कहता हूँ, वो दिल में रहता नहीं।
और जो रहता है, उसे कोई सुनता नहीं,
और जो सुनता है, वो मुस्कुरा देता है।
तूने नंबर सेव किया ही नहीं
तूने मेरा नंबर सेव किया ही नहीं,
और मैंने तेरा हर हफ़्ते देखा।
तूफ़ानों की ख़बरें तक मिल जाती हैं,
तू उस ख़ामोशी में कैसे हो जाती है।
और मैंने तेरा हर हफ़्ते देखा।
तूफ़ानों की ख़बरें तक मिल जाती हैं,
तू उस ख़ामोशी में कैसे हो जाती है।
घर में कोई ख़ुद को हल्ला नहीं करता
घर में कोई ख़ुद को हल्ला नहीं करता,
सब चुप रहते हैं, सब ठीक रहते हैं।
मैं अंदर से टूटकर बैठा रहता हूँ,
और मुस्कुराकर कहता हूँ, कुछ नहीं।
सब चुप रहते हैं, सब ठीक रहते हैं।
मैं अंदर से टूटकर बैठा रहता हूँ,
और मुस्कुराकर कहता हूँ, कुछ नहीं।
हाथ में तेरी चाप दोनों हैं
हाथ में तेरी चाप दोनों हैं,
और सीने में तेरी आवाज़ के सिवा कुछ नहीं।
तूने पूछा, सोचा क्या करूँगा,
मैंने कहा, जो मिला उसे कभी छोड़ूँगा नहीं।
और सीने में तेरी आवाज़ के सिवा कुछ नहीं।
तूने पूछा, सोचा क्या करूँगा,
मैंने कहा, जो मिला उसे कभी छोड़ूँगा नहीं।
प्यार सिर्फ़ लिखने का नहीं होता
प्यार सिर्फ़ लिखने का नहीं होता,
और न सिर्फ़ चाय बनाने का।
वो होता है जब बारिश में भीगकर
आपस से नीचे छुपा लेने का।
और न सिर्फ़ चाय बनाने का।
वो होता है जब बारिश में भीगकर
आपस से नीचे छुपा लेने का।