Emotional

घर में कोई ख़ुद को हल्ला नहीं करता

लेखक: Shayari Mirchi Editorial 👁 11
घर में कोई ख़ुद को हल्ला नहीं करता,
सब चुप रहते हैं, सब ठीक रहते हैं।

मैं अंदर से टूटकर बैठा रहता हूँ,
और मुस्कुराकर कहता हूँ, कुछ नहीं।

घर की शांति और अंदर की बर्फ़, और सबके सामने सब ठीक होने का नाटक।

Shayari Mirchi Editorial

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Shayari Mirchi की एडिटोरियल टीम। यहाँ लिखी गई शायरी, क्वोट और कैप्शन इसी साइट के लिए लिखे गए हैं।

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