खिड़की बंद करके आज भी
खिड़की बंद करके आज भी
उसी दिशा में देखता रहता हूँ।
और जो नज़र नहीं आता, उसे
कहते हैं याद, और मैं कहता हूँ, कमी।
बंद खिड़की के पार देखने की आदत और उससे जुड़े एक अनकही एहसास का नाम।
खिड़की बंद करके आज भी
उसी दिशा में देखता रहता हूँ।
और जो नज़र नहीं आता, उसे
कहते हैं याद, और मैं कहता हूँ, कमी।
बंद खिड़की के पार देखने की आदत और उससे जुड़े एक अनकही एहसास का नाम।