Night Shayari
Raat ko bhejne wale message — sone se pehle.
रात भर भेजे जाने वाले संदेश की शायरी। सोने से पहले सोचने और कहने की बात, इन पंक्तियों में।
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हज़ार लोगों के बीच मेरी कुर्सी
हज़ार लोग बैठे हैं, कुर्सी सिर्फ़ एक है,
मैं वही हूँ जो गिना नहीं गया।
मैं वही हूँ जो गिना नहीं गया।
आज रात में तुझे मिस करता हूँ
आज रात में तुझे मिस करता हूँ,
जबकि तू कहीं जाने का कोई इरादा नहीं करती।
यही शर्म है, मेरी कमी नहीं तेरी है,
इसलिए मैं लेटा हूँ, बस जागना नहीं है।
जबकि तू कहीं जाने का कोई इरादा नहीं करती।
यही शर्म है, मेरी कमी नहीं तेरी है,
इसलिए मैं लेटा हूँ, बस जागना नहीं है।
जिस दर्द को कहना नहीं जाता
जिस दर्द को कहना नहीं जाता, वो सबसे भारी होता है,
क्योंकि उसे सहलाने वाला कोई नहीं होता।
मैं रात को छत पर जाता हूँ, हवा से बात करता हूँ,
पर हवा भी जल्दी हट जाती है, ये भी सच है।
कभी-कभी सोचता हूँ, बोल दूँ किसी से,
मगर सुनने वाला कोढ़ा और देता है।
तो यही दर्द है, किसी को कहना नहीं जाता।
क्योंकि उसे सहलाने वाला कोई नहीं होता।
मैं रात को छत पर जाता हूँ, हवा से बात करता हूँ,
पर हवा भी जल्दी हट जाती है, ये भी सच है।
कभी-कभी सोचता हूँ, बोल दूँ किसी से,
मगर सुनने वाला कोढ़ा और देता है।
तो यही दर्द है, किसी को कहना नहीं जाता।
मैं अकेला रहता हूँ कि नहीं
सवाल यह नहीं कि मैं अकेला हूँ या नहीं,
सवाल यह है कि अकेले में मैं क्या बनता हूँ।
जो लोग मुझे कमज़ोर कहते हैं, उन्हें क्या पता,
मैं अकेले में वो सब बनता हूँ जो भी मिल जाए।
रात को जब पुरानी यादें आती हैं,
मैं उन्हें बोलता हूँ, रहने दो, मैं ठीक हूँ।
सवाल यह है कि अकेले में मैं क्या बनता हूँ।
जो लोग मुझे कमज़ोर कहते हैं, उन्हें क्या पता,
मैं अकेले में वो सब बनता हूँ जो भी मिल जाए।
रात को जब पुरानी यादें आती हैं,
मैं उन्हें बोलता हूँ, रहने दो, मैं ठीक हूँ।
रात को तेरी याद सबको बताऊँगा
रात को तेरी याद सबको बताऊँगा,
और वो लोग कहेंगे, सपना था।
मैं कहूँगा, सपना नहीं, अब ये सच में हो गया,
और सच में होने में वक़्त लगता है यार।
और वो लोग कहेंगे, सपना था।
मैं कहूँगा, सपना नहीं, अब ये सच में हो गया,
और सच में होने में वक़्त लगता है यार।
रात में आँसू तेज़ हो गए हैं
रात में आँसू तेज़ हो गए हैं,
कम्बल गले से लगाकर सोता हूँ।
कभी सोचता हूँ, बताऊँ किसे,
पर बात दर्द की है, शिकायत किसे।
कम्बल गले से लगाकर सोता हूँ।
कभी सोचता हूँ, बताऊँ किसे,
पर बात दर्द की है, शिकायत किसे।