चाँद को सलाम, नींद नहीं आती
चाँद को सलाम, नींद नहीं आती,
रोज़ यही सोचता हूँ, कल से क्या करूँगा।
बोर होकर किताब उठाता हूँ, पन्ना पलटता हूँ,
और सपना बन जाता है, और सपना आ जाता है।
रोज़ यही सोचता हूँ, कल से क्या करूँगा।
बोर होकर किताब उठाता हूँ, पन्ना पलटता हूँ,
और सपना बन जाता है, और सपना आ जाता है।