अकेले चाय पीता हूँ
अकेले चाय पीता हूँ, कप गर्म रहता है,
मगर हाथ नहीं गर्म होता।
बराबरी में दो कप हों तो ज़िंदगी चलती है,
और अकेले कप हो तो सिर्फ़ याद रहती है।
मगर हाथ नहीं गर्म होता।
बराबरी में दो कप हों तो ज़िंदगी चलती है,
और अकेले कप हो तो सिर्फ़ याद रहती है।