Alone

अकेले चाय पीता हूँ

लेखक: Shayari Mirchi Editorial 👁 12
अकेले चाय पीता हूँ, कप गर्म रहता है,
मगर हाथ नहीं गर्म होता।
बराबरी में दो कप हों तो ज़िंदगी चलती है,
और अकेले कप हो तो सिर्फ़ याद रहती है।

एक अकेला कप चाय और गर्मी का एहसास, जो बराबरी में ही मिलता है।

Shayari Mirchi Editorial

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Shayari Mirchi की एडिटोरियल टीम। यहाँ लिखी गई शायरी, क्वोट और कैप्शन इसी साइट के लिए लिखे गए हैं।

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