Bewafa

साथ चलते थे, आज अलग राहें हैं

लेखक: Shayari Mirchi Editorial 👁 11
हम साथ चलते थे, आज अलग-अलग राहें हैं,
और बीच में जो फ़ासला है, वो रास्ता नहीं है।

एक साथ चली राहों के बाद खड़े होने और बीच के फ़ासले को रास्ता कहने की कोशिश।

Shayari Mirchi Editorial

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Shayari Mirchi की एडिटोरियल टीम। यहाँ लिखी गई शायरी, क्वोट और कैप्शन इसी साइट के लिए लिखे गए हैं।

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