Shayari
Shayari ka poora sangrah — pyar se lekar dard tak, har ehsaas ke liye ek line.
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706 shayari entries
मुझे उपास नहीं, अपनाना है
मुझे उपास नहीं, अपनाना है,
और साथ नहीं, सफ़री करनी है।
जो गिरे तो मिला कर उठाना है,
जो चले तो साथ चलने की हिम्मत चाहिए।
और साथ नहीं, सफ़री करनी है।
जो गिरे तो मिला कर उठाना है,
जो चले तो साथ चलने की हिम्मत चाहिए।
मुँह बुरा सुना तो बुरा नहीं
मुँह बुरा सुना तो बुरा नहीं होता,
कान बुरा सुनते हैं, काम बुरा नहीं करते।
और जो काम बुरा करते हैं, उनकी
अपनी ज़रूरत है, उनकी मत पूछिए।
कान बुरा सुनते हैं, काम बुरा नहीं करते।
और जो काम बुरा करते हैं, उनकी
अपनी ज़रूरत है, उनकी मत पूछिए।
अपनी जगह का रक़म
अपनी जगह का रक़म लेकर जाता हूँ,
किसी की ज़मीन पर बैठकर नहीं रहता।
जो लोग मेरी जगह ले लेते हैं,
उन्हें दर्द तो होता है, पर सोचते ग़लत हैं।
किसी की ज़मीन पर बैठकर नहीं रहता।
जो लोग मेरी जगह ले लेते हैं,
उन्हें दर्द तो होता है, पर सोचते ग़लत हैं।
हिम्मत मेरी अपनी है
हिम्मत मेरी अपनी है, उधार की नहीं,
और इरादा भी मेरा, किसी और का नहीं।
लोग बोलते हैं, रास्ता मुश्किल से मिलता है,
मैं कहता हूँ, मुश्किल रास्ता बदल देती है।
और इरादा भी मेरा, किसी और का नहीं।
लोग बोलते हैं, रास्ता मुश्किल से मिलता है,
मैं कहता हूँ, मुश्किल रास्ता बदल देती है।
मैं अकेला रहता हूँ कि नहीं
सवाल यह नहीं कि मैं अकेला हूँ या नहीं,
सवाल यह है कि अकेले में मैं क्या बनता हूँ।
जो लोग मुझे कमज़ोर कहते हैं, उन्हें क्या पता,
मैं अकेले में वो सब बनता हूँ जो भी मिल जाए।
रात को जब पुरानी यादें आती हैं,
मैं उन्हें बोलता हूँ, रहने दो, मैं ठीक हूँ।
सवाल यह है कि अकेले में मैं क्या बनता हूँ।
जो लोग मुझे कमज़ोर कहते हैं, उन्हें क्या पता,
मैं अकेले में वो सब बनता हूँ जो भी मिल जाए।
रात को जब पुरानी यादें आती हैं,
मैं उन्हें बोलता हूँ, रहने दो, मैं ठीक हूँ।
मेरे लिए तेरी वैल्यू ज़ीरो
मेरे लिए तेरी वैल्यू ज़ीरो है,
ज़ीरो की नीलामी भी नहीं होती।
तू जो दावा लगाता है अपना,
वो सिर्फ़ शोर है, इतना भी नहीं।
ज़ीरो की नीलामी भी नहीं होती।
तू जो दावा लगाता है अपना,
वो सिर्फ़ शोर है, इतना भी नहीं।
जिस दिन आवाज़ मिलेगी, उस दिन
जिस दिन आवाज़ मिलेगी, उस दिन मैं सुनूँगा,
आज तक सिर्फ़ ख़ामोशी मिली है।
लोग कहते हैं, समय आने पर सब होता है,
मैं कहता हूँ, समय नहीं, इरादा चाहिए।
आज तक सिर्फ़ ख़ामोशी मिली है।
लोग कहते हैं, समय आने पर सब होता है,
मैं कहता हूँ, समय नहीं, इरादा चाहिए।
मेहनत मेरी निबंध नहीं है
मेहनत मेरी निबंध नहीं है,
मेरी मर्ज़ी चले तो रुकती नहीं।
और रुकी नहीं तो वो मुझे रोकेंगे कैसे,
जिसे रोकने के लिए इरादा चाहिए, वो मेरे पास नहीं।
मेरी मर्ज़ी चले तो रुकती नहीं।
और रुकी नहीं तो वो मुझे रोकेंगे कैसे,
जिसे रोकने के लिए इरादा चाहिए, वो मेरे पास नहीं।