Love Shayari
Pyar ki shayari — woh baatein jo dil se nikalne mein waqt lagta hai.
प्यार, मोहब्बत और रिश्तों की बात कहने वाली शायरी — जब दिल में कोई है और शब्द ढूँढ रहे हों।
46 entries in this collection
वो शीशा जिसमें तेरी शक्ल है
आईने के सामने कभी मैं ख़ुद नहीं देखता,
तुम्हारी शक्ल देखता हूँ, गिनता हूँ।
जो तुम्हें देखकर सुधरा, वो आईना भी,
मेरी तरफ़ देखकर आज भी सिकुड़ जाता है।
तुम्हारी शक्ल देखता हूँ, गिनता हूँ।
जो तुम्हें देखकर सुधरा, वो आईना भी,
मेरी तरफ़ देखकर आज भी सिकुड़ जाता है।
मैंने तेरे लिए चाय की चाबी
मैंने तेरे लिए चाय की चाबी बनाई,
चाहिए तो बस उधार ले जाना।
उस चाबी से हर बंद दरवाज़ा खुल जाता,
मगर तेरी हँसी का इंतज़ार रह जाता।
चाहिए तो बस उधार ले जाना।
उस चाबी से हर बंद दरवाज़ा खुल जाता,
मगर तेरी हँसी का इंतज़ार रह जाता।
पहली मुलाक़ात का वक़्त अकेला
कॉफ़ी की दुकान भर गई, मैं कोने में बैठा,
तुम सामने आईं, और मेरी नींद उड़ गई।
उस दिन से हर पल मेरा गिना गया,
तुम गईं, और वो गिनती बाक़ी रही।
तुम सामने आईं, और मेरी नींद उड़ गई।
उस दिन से हर पल मेरा गिना गया,
तुम गईं, और वो गिनती बाक़ी रही।
मैगी देर से बनाना आदत बन गया
मैगी देर से बनती है, तू देर से आती है,
मैं रोज़ बर्तन जोड़ता हूँ, ख़ुद को समझाता हूँ।
तूने कहा था, ख़ुदा देखेगा इंतज़ार का,
मैंने गिने साल, हर साल वही सी चौहान्दी।
आज भी मेज़ पर दो कटोरी हैं, एक ही रस्सी से बंधी,
एक कटोरी सूखी रहती है, फिर भी मैं धोता हूँ।
लोग कहते हैं, ज़िंदगी में हर चीज़ मिलती है,
मैं कहता हूँ, कुछ चीज़ें बस टाइम पर नहीं मिलतीं।
मैं रोज़ बर्तन जोड़ता हूँ, ख़ुद को समझाता हूँ।
तूने कहा था, ख़ुदा देखेगा इंतज़ार का,
मैंने गिने साल, हर साल वही सी चौहान्दी।
आज भी मेज़ पर दो कटोरी हैं, एक ही रस्सी से बंधी,
एक कटोरी सूखी रहती है, फिर भी मैं धोता हूँ।
लोग कहते हैं, ज़िंदगी में हर चीज़ मिलती है,
मैं कहता हूँ, कुछ चीज़ें बस टाइम पर नहीं मिलतीं।
चाँद को देखकर तेरा चेहरा
चाँद को देखकर मुझे तेरा चेहरा याद आता है,
यह बात सुनकर चाँद शायद शरमा जाएगा।
उसने पूरी रात जागकर हमें देखा,
और मैं रोज़ सोचता हूँ, तेरे चेहरे पर भी ऐतसान है।
अब मैं अमावस्या को नहीं देखता,
मैं तो सिर्फ़ तेरी रोशनी के साथ चलता हूँ।
यह बात सुनकर चाँद शायद शरमा जाएगा।
उसने पूरी रात जागकर हमें देखा,
और मैं रोज़ सोचता हूँ, तेरे चेहरे पर भी ऐतसान है।
अब मैं अमावस्या को नहीं देखता,
मैं तो सिर्फ़ तेरी रोशनी के साथ चलता हूँ।
तुझसे बात करता तो हँसता हूँ
तुझसे बात करता हूँ तो हँसता हूँ,
फिर अकेले आते तो सोचता हूँ।
तू नहीं जानती, सालों बाद भी तेरी मुस्कान
मेरे लिए कितना काम करती है।
फिर अकेले आते तो सोचता हूँ।
तू नहीं जानती, सालों बाद भी तेरी मुस्कान
मेरे लिए कितना काम करती है।
तुझे देखकर कि सब भूले
तुझे देखकर कि सब भूल गया,
मेरा अक्सर, मेरी जगह, मेरा कल।
और जब तू चली गई, फिर याद आया,
कि दुनिया में सब कुछ है, बस मैं नहीं।
मेरा अक्सर, मेरी जगह, मेरा कल।
और जब तू चली गई, फिर याद आया,
कि दुनिया में सब कुछ है, बस मैं नहीं।