तुझसे बात करता तो हँसता हूँ
तुझसे बात करता हूँ तो हँसता हूँ,
फिर अकेले आते तो सोचता हूँ।
तू नहीं जानती, सालों बाद भी तेरी मुस्कान
मेरे लिए कितना काम करती है।
फिर अकेले आते तो सोचता हूँ।
तू नहीं जानती, सालों बाद भी तेरी मुस्कान
मेरे लिए कितना काम करती है।
फ़ोन पर मिलने वाली ख़ुशी और फिर अकेले में आने वाले सवाल, दोनों अपनी जगह हैं।