माँ के घर की रोटी
माँ के घर की रोटी आज भी अलग लगती है,
दुनिया की रोटी में दिल नहीं मिलता।
घर की रोटी और उसमें मिलने वाला एक अलग एहसास, दो पंक्तियों में।
माँ के घर की रोटी आज भी अलग लगती है,
दुनिया की रोटी में दिल नहीं मिलता।
घर की रोटी और उसमें मिलने वाला एक अलग एहसास, दो पंक्तियों में।