Dosti

माँ के घर की रोटी

लेखक: Shayari Mirchi Editorial 👁 26

माँ के घर की रोटी आज भी अलग लगती है,
दुनिया की रोटी में दिल नहीं मिलता।

घर की रोटी और उसमें मिलने वाला एक अलग एहसास, दो पंक्तियों में।

Shayari Mirchi Editorial

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Shayari Mirchi की एडिटोरियल टीम। यहाँ लिखी गई शायरी, क्वोट और कैप्शन इसी साइट के लिए लिखे गए हैं।

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