Dosti

माँ के घर की रोटी

लेखक: Shayari Mirchi Editorial 👁 3
माँ के घर की रोटी आज भी अलग लगती है,
दुनिया की रोटी में दिल नहीं मिलता।
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घर की रोटी और उसमें मिलने वाला एक अलग एहसास, दो पंक्तियों में।

Shayari Mirchi Editorial

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Shayari Mirchi की एडिटोरियल टीम। यहाँ लिखी गई शायरी, क्वोट और कैप्शन इसी साइट के लिए लिखे गए हैं।

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