चुप्पी रहते हैं यार, पसंद है मुझे
चुप्पी रहते हैं यार, पसंद है मुझे,
बातें कम, हमदद बढ़ती है।
शाम को छत पर बैठना, चाय का कप,
और बीच में बस चुप्पी, यही अपनापन है।
कम बातों और ज़्यादा समझ वाली दोस्ती, जिसमें छत पर बैठना ही रीत बन गया है।
चुप्पी रहते हैं यार, पसंद है मुझे,
बातें कम, हमदद बढ़ती है।
शाम को छत पर बैठना, चाय का कप,
और बीच में बस चुप्पी, यही अपनापन है।
कम बातों और ज़्यादा समझ वाली दोस्ती, जिसमें छत पर बैठना ही रीत बन गया है।