अपनी कहानी सुनाना
अपनी कहानी सुनाने का मौक़ा कम मिलता है,
और सुनने वाले उल्टे दिन बदल देते हैं।
अपनी बात किसी तक न पहुँच पाने पर एक निजी क्वोट।
अपनी कहानी सुनाने का मौक़ा कम मिलता है,
और सुनने वाले उल्टे दिन बदल देते हैं।
अपनी बात किसी तक न पहुँच पाने पर एक निजी क्वोट।