Heart Touching

वो शीशा जिसमें तेरी शक्ल है

लेखक: Shayari Mirchi Editorial 👁 3
आईने के सामने कभी मैं ख़ुद नहीं देखता,
तुम्हारी शक्ल देखता हूँ, गिनता हूँ।
जो तुम्हें देखकर सुधरा, वो आईना भी,
मेरी तरफ़ देखकर आज भी सिकुड़ जाता है।
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आईने में अपनी जगह किसी और की शक्ल को देखना, और फिर भी सुधरना।

Shayari Mirchi Editorial

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Shayari Mirchi की एडिटोरियल टीम। यहाँ लिखी गई शायरी, क्वोट और कैप्शन इसी साइट के लिए लिखे गए हैं।

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