पहली मुलाक़ात का वक़्त अकेला
कॉफ़ी की दुकान भर गई, मैं कोने में बैठा,
तुम सामने आईं, और मेरी नींद उड़ गई।
उस दिन से हर पल मेरा गिना गया,
तुम गईं, और वो गिनती बाक़ी रही।
तुम सामने आईं, और मेरी नींद उड़ गई।
उस दिन से हर पल मेरा गिना गया,
तुम गईं, और वो गिनती बाक़ी रही।
भीड़ भरी दुकान में कोने से शुरू हुआ एक पहला मिलन, जिसकी गिनती आज भी अधूरी है।