जब तेरी हँसी रुक जाए
जब तेरी हँसी रुक जाए तो मौन भारी हो,
मैं खिड़की खोलता हूँ, तू आ जा दो।
मैं खिड़की खोलता हूँ, तू आ जा दो।
एक ठहरी हुई हँसी से शुरू होती खिड़की, और उससे आती ख़ामोशी की उम्मीद।
एक ठहरी हुई हँसी से शुरू होती खिड़की, और उससे आती ख़ामोशी की उम्मीद।