अपनी जगह का रक़म
अपनी जगह का रक़म लेकर जाता हूँ,
किसी की ज़मीन पर बैठकर नहीं रहता।
जो लोग मेरी जगह ले लेते हैं,
उन्हें दर्द तो होता है, पर सोचते ग़लत हैं।
अपनी जगह का हिसाब लेकर जाने की आदत, और उसकी कीमत पर सोचने वालों पर व्यंग्य।
अपनी जगह का रक़म लेकर जाता हूँ,
किसी की ज़मीन पर बैठकर नहीं रहता।
जो लोग मेरी जगह ले लेते हैं,
उन्हें दर्द तो होता है, पर सोचते ग़लत हैं।
अपनी जगह का हिसाब लेकर जाने की आदत, और उसकी कीमत पर सोचने वालों पर व्यंग्य।