खिड़की के किनारे बैठना चाहता हूँ
खिड़की के किनारे बैठना चाहता हूँ,
आज भी वहीं बारिश सुननी है।
खिड़की की जगह और बारिश की आवाज़, दोनों बराबर पुरानी हो चुके हैं।
खिड़की के किनारे बैठना चाहता हूँ,
आज भी वहीं बारिश सुननी है।
खिड़की की जगह और बारिश की आवाज़, दोनों बराबर पुरानी हो चुके हैं।