Pyar Mein Dard Bhari Shayari | प्यार में दर्द भरी शायरी हिंदी में

Pyar Mein Dard Bhara Shayari in Hindi | बेहतरीन 2 लाइन दर्द भरी शायरी | Dard Bhari Shayari In Hindi |  दर्द भरी शायरी हिंदी 2 लाइन | 2 Line Dard Shayari Hindi | प्यार में दर्द भरी शायरी हिंदी में.

Pyar Mein Dard Bhari Shayari Hindi

खुद ही रोए और खुद ही चुप हो गए,
ये सोचकर की कोई अपना होता तो रोने ना देता!!

 

तेरा साथ छूटा है सँभलने में वक्त तो लगेगा,
हर चीज़ इश्क़ तो नहीं जो एक पल में हो जाये।

 

आधा ख्वाब, आधा इश्क़, आधी सी है बंदगी,
मेरे हो…पर मेरे नही.. कैसी है ये जिंदगी…

 

ये लकीरें, ये नसीब, ये किस्मत सब फ़रेब के आईनें हैं,
हाथों में तेरा हाथ होने से ही मुकम्मल ज़िंदगी के मायने हैं.

 

क्यूँ हर बात में कोसते हो तुम लोग नसीब को,
क्या नसीब ने कहा था की मोहब्बत कर लो !!

 

जिसके नसीब मे हों ज़माने की ठोकरें,
उस बदनसीब से ना सहारों की बात कर।

 

मुजे ऊंचाइयों पर देखकर हैरान है बहुत लोग,
पर किसी ने मेरे पैरो के छाले नहीं देखे…..!!

 

मौहब्बत की मिसाल में,बस इतना ही कहूँगा ।
बेमिसाल सज़ा है,किसी बेगुनाह के लिए

 

इश्क में इसलिए भी धोखा खानें लगें हैं लोग
दिल की जगह जिस्म को चाहनें लगे हैं लोग..

 

सिर्फ मोहब्बत ही ऐसा खेल है..
जो सिख जाता है वही हार जाता है।

 

Pyar Mein Dard Bhari Shayari Hindi

इस दुनिया मेँ अजनबी रहना ही ठीक है….
लोग बहुत तकलीफ देते है अक्सर अपना बना कर !!

 

रिश्ते खराब होने की एक वजह ये भी है,
कि लोग झुकना पसंद नहीं करते…!!

 

तुमने समझा ही नहीं…और ना समझना चाहा,
हम चाहते ही क्या थे तुमसे… तुम्हारे सिवा

 

लूट लेते हैं अपने ही,
वरना गैरों को क्या पता इस दिल की दीवार
कमजोर कहाँ से है !

 

सीख जाओ वक्त पर किसी की चाहत की कदर करना..
कहीं कोई थक ना जाये तुम्हें एहसास दिलाते दिलाते..

 

तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे..
मैं एक शाम चुरा लूँ अगर बुरा न लगे..!!!

 

बुला रहा है कौन मुझको उस तरफ,
मेरे लिए भी क्या कोई उदास बेक़रार है।

 

लोग मुन्तज़िर ही रहे कि हमें टूटा हुआ देखें
और हम थे कि दर्द सहते-सहते पत्थर के हो गए

 

तुम दूर हो या पास फर्क किसे पड़ता है,
तू जँहा भी रहे तेरा दिल तो यँही रहता है..!!

 

उदास दिल है मगर मिलता हूँ हर एक से हँस कर,
यही एक फन सीखा है बहुत कुछ खो देने के बाद।

 

Pyar Mein Dard Bhari Shayari Hindi

बिछड़कर फिर मिलेंगे यकीन कितना था,
बेशक ये ख्वाब था मगर हसीन कितना था।

 

पहली बारिश का नशा ही कुछ अलग होता हैं,
पलको को छूते ही सीधा दिल पे असर होता हैं।

 

सुनो ये बादल जब भी बरसता है,
मन तुझसे ही मिलने को तरसता है..!!

 

मरहम लगा सको तो गरीब के जख्मो पर लगा देना
हकीम बहुत है बाजार में अमीरो के इलाज खातिर !!

 

ऐ उदास पल जरा धीरे धीरे चल
तू भी चला गया तो कैसे पाउँगा संभल

 

बस ये हुआ कि उस ने तकल्लुफ़ से बात की,
और हम ने रोते रोते दुपट्टे भिगो लिए।

 

मजबूरियाँ होती है, यक़ीन जाता है,
बचपन का प्यार अक्सर तजुर्बे दे जाता है !!

 

वक़्त बदल जाता है पर हसरतें कहा बदलती है
कमी तो सारी उम्र रहती है पर ज़िंदगी ख़त्म कहाँ होती है.

 

मुद्दतें बीत गई ख्वाब सुहाना देखे,
जागता रहता है हर नींद में बिस्तर मेरा।

 

हम पर जो गुजरी है, तुम क्या सुन पाओगे,
नाजुक सा दिल रखते हो, रोने लग जाओगे।

 

Pyar Mein Dard Bhari Shayari Hindi

दिल से मिटा न पाओगे मैंने कहा तो था,
तुम किसी और के होके भी मेरे ही रहे।

 

ना छेड़ किस्सा वो मोहब्बत का बड़ी लम्बी कहानी है,
मैं ज़िंदगी से नहीं हारा किसी अपने की मेहरबानी है।

 

वो तेरे खत तेरी तस्वीर और सूखे फूल,
उदास करती हैं मुझ को निशानियाँ तेरी।

 

वह मेरा सब कुछ है पर मुक़द्दर नहीं,
काश वो मेरा कुछ न होता पर मुक़द्दर होता।

 

मेरे साथ धोखा तो उन लोगो ने किया,
जिन्होंने अपना होने का दावा सबसे ज्यादा किया था !!

 

खामोशियाँ वही रही ता-उम्र दरमियाँ,
बस वक़्त के सितम और हसीन होते गए।

 

दिल को बुझाने का बहाना कोई दरकार तो था,
दुःख तो ये है तेरे दामन ने हवायें दी हैं।

 

आज उस ने एक दर्द दिया तो मुझे याद आया
हमने ही दुआओं में उसके सारे दर्द माँगे थे,.

 

अजब चिराग हूँ दिन-रात जलता रहता हूँ,
थक गया हूँ मैं हवा से कहो बुझाए मुझे।

 

हमने सोचा था कि बताएंगे दिल का दर्द तुमको
पर तुमने तो इतना भी न पूछा कि खामोश क्यों हो

Pyar Mein Dard Bhari Shayari Hindi

अपनी जिंदगी अजीब रंग में गुजरी है,
राज किया दिलों पे और मोहब्बत को तरसे।

 

जब कभी फुर्सत मिले मेरे दिल का बोझ उतार दो,
मैं बहुत दिनों से उदास हूँ मुझे कोई शाम उधार दो।

 

खुद आग दे के अपने नशेमन को आप ही,
बिजली से इन्तेकाम लिया है कभी-कभी।

 

ऐसा लगता है कि वो भूल गया है हमको,
अब कभी खिड़की का पर्दा नहीं बदला जाता।

 

गुलों के साये में अक्सर तड़पा हूँ,
करार कांटों पे कुछ ऐसा पा लिया मैंने।

 

चलो अब जाने भी दो क्या करोगे दास्ताँ सुनकर,
ख़ामोशी तुम समझोगे नहीं और बयाँ हमसे होगा नहीं।

 

बेवक्त बेवजह बेसबब सी बेरुखी तेरी,
फिर भी बेइंतहा तुझे चाहने की बेबसी मेरी।

 

देखी है बेरुखी की आज हम ने इन्तेहाँ,
हमपे नजर पड़ी तो वो महफ़िल से उठ गए।

 

ना दर्द हुआ सीने में, ना माथे पे शिकन आयी
इस बार जो दिल टूटा तो बस चेहरे पे मुस्कान आयी

 

हजारों जवाब से अच्छी मेरी ख़ामोशी,
न जाने कितने सवालों की आबरू रख ली।

इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना
दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना

 

मुँह खोल कर तो हंस देता हूँ मैं हर किसी के साथ,
लेकिन दिल खोल कर हंसे मुझे ज़माने गुज़र गए !!