तेरा चेहरा मेरी हवा का मौज
तेरा चेहरा मेरी हवा का मौज है,
और तेरी आँखें मेरी रात का साज़ा।
मैं जब भी तुझसे मिलता हूँ, लगता है
कि सारी थकान किसी ने मेरी साँस से उठा ली।
कभी सोचता हूँ, ख़ुदा ने बनाने में वक़्त कहाँ लगाया,
कि एक इंसान इतना सुंदर बन गया।
और तेरी आँखें मेरी रात का साज़ा।
मैं जब भी तुझसे मिलता हूँ, लगता है
कि सारी थकान किसी ने मेरी साँस से उठा ली।
कभी सोचता हूँ, ख़ुदा ने बनाने में वक़्त कहाँ लगाया,
कि एक इंसान इतना सुंदर बन गया।
हवा और रात के सजावट से किसी के बारे में कहा गया, और थकान अचानक ग़ायब होने का एहसास।