मेहनत मेरी निबंध नहीं है
मेहनत मेरी निबंध नहीं है,
मेरी मर्ज़ी चले तो रुकती नहीं।
और रुकी नहीं तो वो मुझे रोकेंगे कैसे,
जिसे रोकने के लिए इरादा चाहिए, वो मेरे पास नहीं।
मेहनत पर लगातार ज़ोर देने वाली ज़िद और उससे रोकने वालों की कमी पर व्यंग्य।
मेहनत मेरी निबंध नहीं है,
मेरी मर्ज़ी चले तो रुकती नहीं।
और रुकी नहीं तो वो मुझे रोकेंगे कैसे,
जिसे रोकने के लिए इरादा चाहिए, वो मेरे पास नहीं।
मेहनत पर लगातार ज़ोर देने वाली ज़िद और उससे रोकने वालों की कमी पर व्यंग्य।