जब भी थकूँगा, चल पड़ूँगा
जब भी थकूँगा, चल पड़ूँगा,
रुकना मेरी डिक्शनरी में नहीं है।
थकान को मानने से इनकार और आगे बढ़ने का ज़िद, दो पंक्तियों में।
जब भी थकूँगा, चल पड़ूँगा,
रुकना मेरी डिक्शनरी में नहीं है।
थकान को मानने से इनकार और आगे बढ़ने का ज़िद, दो पंक्तियों में।