Rahat Indori Love Shayari 2022 | राहत इंदौरी लव शायरी हिंदी

Rahat Indori Love Shayari | राहत इंदौरी लव शायरी हिंदी | Rahat Indori Love shayari in Hindi | राहत इंदौरी की मशहूर शायरी हिंदी में | Rahat Indori Famous Shayari in Hindi | राहत इंदौरी शायरी हिंदी 4 लाइन 

Rahat Indori Love Shayari in Hindi

अजीब दौर है गुरबत की सर बुलंदी का ,
पडा़ई  छोड़कर बच्चे कमाने लगते है,
और नए अमीर के घर भूल कर भी मत जाना ,
हर एक चीज़ की कीमत बताने लगते है ।

“गुरबत = गरीबी या परेशानी”

 

गमों का शोक मनाकर क्या मुस्कुराते हम ,
जरा भी हार से डरते तो हार जाते हम ,
खुदा का शुक्र कि मौज़ो से दो दो हाथ किये,
किसी की आस में रहते तो डूब जाते हम ,

“मौजों = लहर या तूफान का झोंका”

 

तुझे छोडू तो मेरा वादा टूट जाता है,
तुझे अपनाऊँ तो मुझसे जमाना छूट जाता है,
मोहब्बत पड़ने लिखने में बहुत आसान है लेकिन ,
मोहब्बत को निभाने में पसीना छूट जाता है।

 

इश्क़ में जीत के आने के लिए काफी हूं
मैं निहत्था ही जमाने के लिए काफी हूं
मेरी हर हकीकत को मेरी ख़ाक समझने वाले..
मैं तेरी नींद उड़ाने के लिए हीं काफी हूं.

 

मेरे लहू से रौशन है शहर के सब चराग,
मुझपर भी तोहमते है वफादारियों के बाद ,
जिन्दा है किस तरह से ये मुनाफ़िक़ मिज़ाज़ लोग ,
वो भी हज़ार तरह की बीमारियों के बाद ,

तोहमते = झूठे इल्जाम (आरोप )
मुनाफिक = (धोखेबाज )

 

Rahat Indori Love Shayari in Hindi

दर्द भरी इन आंखों को,
बस इक तुम्हारा साथ चाहिए,,
अकेले इन तंग राहों में लड़खड़ा से जाते हैं पांव मेरे,,,
बस मेरे हाथों में तुम्हारा हाथ चाहिए!!

 

उल्फत  के  खजाने  से  दो  गौहर  निकल  आये ,
गो  लाख  किया  जप्त  मगर  फिर  निकल  आये ,
पूछो  ना   मेरे   अश्क़   ये  क्यों  कर  निकल  आये ,
तुम   आँख  में   ठहरे  तो  ये  बाहर  निकल  आये।

 

तुम्हारा  घर  हमेशा  रौशनी  से जगमगाऊँगा,
दिएँ  खामोश  हो  जाये  तो  अपना  दिल  जलाऊंँगा ,
तुम्हे  जिस  दिन  यकी  हो  जाये  की  मुझमे  खूबियाँ  भी  है ,
मुझे  आवाज  दे  देना  मैं  वापस  लौट  आऊँगा ।

 

“ज़मीर बोलता है ऐतबार बोलता है
मेरी ज़ुबान से परवरदिगार बोलता है !

मैं मन की बात बहुत मन लगा के सुनता हूँ
ये तू नहीं है तेरा इश्तेहार बोलता है !!

कुछ और काम उसे याद ही नही शायद
मगर वो झूठ बहुत शानदार बोलता है !!!

तेरी ज़ुबान कतरना बहुत ज़रूरी है
तुझे ये मर्ज़ है तू बार बार बोलता है !!!!”

 

कौन कहता है दोस्त की तुमसे हमारा जुदाई होगी,
ये अफवाह जरूर किसी दुशमन ने उड़ाई होगी,
शान से रहने तुम्हारे दिल में हम,
इतनों दिनों में कुछ तो जगहा बनाई होगी।

 

Rahat Indori Love Shayari in Hindi

शौहरत की बुलन्दी भी पल भर का तमाशा है
जिस डाल पर बैठे हो, वो टूट भी सकती है
मुहब्बतों में दिखावे की दोस्ती न मिला
अगर गले नहीं मिलता तो हाथ भी न मिला।

 

कोई हमे भूल जाने की ज़िद में है,
कोई हमे आज़माने की ज़िद मैं है,
भूलने वाले भूले मुझे तो कोई गम नहीं,
क्योकी अपना कोई हमे पाने की ज़िद में है…

 

उमर की राह मे रास्ते बदल जाते हैं
वक़्त की आँधी मे इंसान बदल जाते हैं
सोचते हैं आपको इतना याद ना करे
लेकिन आँख बंद करते ही इरादे बदल जाते हैं।

 

तेरी याद में आँखे भिगो लू,
उदास रात की तन्हाई में सो लू,
अकेले गम का बोझ अब संभलता नहीं
तू मिल जाये तो तुझसे लिपट कर रो लू..

 

आग केपास कभी मोम को लाकर देखूं ।
हो इज़ाज़त तो तुझे हाथ लगाकर देखूं ।
दिल कामंदिर बड़ा वीरान नज़र आता है ।
सोचता हूँ तेरी तस्वीर लगाकर देखूं ||

 

“इन रातों से अपना रिश्ता जाने कैसा रिश्ता है
नींदें कमरों में जागी हैं ख़्वाब छतों पर बिखरे हैं.”

 

मेरी रूह-ए-दिल से मोहब्बत करने का हक,
सिर्फ़ उस एक शख़्स को ही है ।
जिसके लिए ख़ुदा की पनाह में बैठ,
बोलूंगी क़बूल है, क़बूल है, क़बूल है ।

 

Rahat Indori Love Shayari in Hindi

“जो सच है वही घर का नसीब है लेकिन
जो खो गया है उसे भी मकान में रखना

वो एक ख़्वाब जो चेहरा कभी नहीं बनता
बना के चांद उसे आसमान में रखना

चमकते चांद सितारों का क्या भरोसा है
ज़मीं की धूल भी अपनी उड़ान में रखना..”

 

देता रहू अपनी मोहब्बत का हिसाब कितना
चेहरे पर लगा कर रखूं झूठा नकाब कितना।
सुना है उनके चाहने वाले बेहिसाब है ऐ राज
मुमकिन नही है उनका हमसे रूबरू मिलना।।

 

यूं तो हम हिज़र में भी दीवार-ओ-दर को देखते हैं
कभी सबा को कभी नामाबर को देखते हैं
वो आये घर में हमारे खुदा की कुदरत है
कभी हम उन को कभी अपने घर को देखते हैं.

 

मेरी ग़ज़ल से बना ज़ेहन में कोई तस्वीर
सबब न पूछ मेरे देवदास होने का
कहाँ, हो आओ मेरी भूली-बिसरी यादो आओ
ख़ुश-आमदीद है मौसम उदास होने का.

 

दर्द होता नहीं दुनिया को दिखाने के लिए,
हर कोई रोता नहीं आँसू बहाने के लिए,
रुठने का मज़ा तो तब आता है,
जब कोई अपना होता है मनाने के लिए…

हाथ ख़ाली हैं तेरे शहर से जाते जाते,
जान होती तो मेरी जान लुटाते जाते,
अब तो हर हाथ का पत्थर हमें पहचानता है,
उम्र गुज़री है तेरे शहर में आते जाते।

 

अब जो बाज़ार में रखे हो तो हैरत क्या है
जो भी देखेगा वो पूछेगा की कीमत क्या है
एक ही बर्थ पे दो साये सफर करते रहे
मैंने कल रात यह जाना है कि जन्नत क्या है.

 

जा के कोई कह दे, शोलों से चिंगारी से ,
फूल इस बार खिले हैं बड़ी तैयारी से,
बादशाहों से भी फेंके हुए सिक्के ना लिए ,
हमने खैरात भी मांगी है तो खुद्दारी से ।।