Dhokebaaz Shayari in Hindi | धोखेबाज़ शायरी हिंदी में.!

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Dhokebaaz Shayari in Hindi

समझे बिना किसी को पसंद ना करो
और समझे बिना किसी को खो भी मत देना।
क्योंकि फिक्र दिल में होती हैं शब्दों में नहीं
और गुस्सा शब्दों में होता हैं दिल में नहीं॥

 

सोचा था तड़पायेंगे हम उन्हें,
किसी और का नाम लेके जलायेगें उन्हें,
फिर सोचा मैंने उन्हें तड़पाके दर्द मुझको ही होगा,
तो फिर भला किस तरह सताए हम उन्हें।

 

हम जानते है आप जीते हो जमाने के लिए,
एक बार तो जीके देखो सिर्फ हमारे लिए,
इस नाचीज़ की दिल क्या चीज़ है,
हम तो जान भी देदेंगे आप को पाने के लिए।

 

हर पल साथ देने का वादा करते हैं तुझसे,
क्यों अपनापन इतना ज्यादा है तुझसे,
कभी ये मत सोचना भूल जायेंगे तुझे हम,
हर पल साथ निभाने का वादा है तुझसे।

 

तेरा यूँ मेरे सपनो में आना ये तेरा कसूर था,
और तुझ से दिल लगाना ये मेरा कसूर था,
कोई आया था पल दो पल को जिंदगी में,
और सर अपना समझ लेना वो मेरा कसूर था।

 

Dhokebaaz Shayari in Hindi

इस दिल में आग सी लग गई जब वो खफा हुए,
फर्क तो तब पड़ा जब वो जुदा हुए,
हमे वो वफ़ा करके तो कुछ दे न सके,
लेकिन दे गये वो बहुत कुछ जब वो वेबफा हुए।

 

एक उम्र भर की जुदाई मेरे नसीब में करके,
वो तो चला गया बातें अजीब करके,
तर्ज ए वफा को उसकी क्या नाम दूं,
खुद तो दूर चला गया मुझे करीब करके।

 

ऐ बेवफा सांस लेने से तेरी याद आती है,
ऐ बेवफा सांस न लूँ तो भी मेरी जान जाती है,
मैं कैसे कह दूं कि बस मैं सांस से जिंदा हूँ,
ये सांस भी तो तेरी याद आने के बाद आती है।

 

मोहब्बत ऐसी थी कि उनको बता न सके,
चोट दिल पे थी इसलिए दिखा न सके,
हम चाहते तो नही थे उनसे दूर होना,
मगर दूरी इतनी थी उसे हम मिटा न सके।

 

ना समझो कि हम आपको भुला सकेंगे।
आप नही जानते की दिल मे छुपा कर रखेंगे।
देख ना ले आपको कोई हमारी आँखों मे दूर से।
इसी लिए हम पालखे झुका के रखेंगे।

 

Dhokebaaz Shayari in Hindi

हमने रस्म रिवाज़ों से बग़ावत की है,
हमने वेपन्हा उनसे मोहब्बत की है,
दुआओं में जिसे था कभी मांगा,
आज उसी ने जुदा होने की चाहत की है।

 

कभी रूत ना जाना मुझे मनाना नहीं आता
कभी दूर ना जाना मुझे पास बुलाना नहीं आता
अगर तुम भूल जाओ तो वो तुम्हारी मर्जी
हमें तो भूल जाना भी नहीं आता ||

 

भूलकर हमें अगर तुम रहते हो सलामत,
तो भूलके तुमको संभालना हमें भी आता है,
मेरी फ़ितरत में ये आदत नहीं है वरना,
तेरी तरह बदल जाना मुझे भी आता है।

 

मुझे उससे कोई शिकवा है न गिला है,
मेरे दर्द की बस न ही कोई दवा है,
बहुत आँसू बह है उसके लिए,
जिसे कुदरत ने मेरे लिये बनाया ही नही है।

 

हज़ारो बातें मिल कर एक राज़ बनता है
सात सुरों के मिलने से साज़ बनता है
आशिक़ के मरने पर कफ़न भी नहीं मिलता
और हसीनाओ के मरने पर ताज़ बनता है.

 

Dhokebaaz Shayari in Hindi

पल भर के लिए अगर वो हमे अपना बना ले,
अपनी ज़िंदगी का अगर वो सपना बना ले,
फिर भले ही दम निकल जाये हमारा,
बस एक रात के लिए वो मुझे अपना बना ले।

 

मेरी चाहत ने उसे खुशी दे दी,
बदले में उसने मुझे सिर्फ खामोशी दे दी,
खुदा से दुआ मांगी मरने की लेकिन,
उसने भी तड़पने के लिए जिन्दगी दे दी।

 

इस जमीन से तो हम रिश्ता तोड़ जाएंगे,
बस यादों का एक शहर छोड़ जाएंगे,
वेबफा तू मुझे सताएगा कितना,
एक दिन तुझसे हमेशा के लिए मुह मोड़ जाएंगे।

 

दर्द है दिल में पर इसका एहसास नहीं होता;
रोता है दिल जब वो पास नहीं होता;
बर्बाद हो गए हम उसके प्यार में;
और वो कहते हैं इस तरह प्यार नहीं होता.

 

ये मत सोच के मैं तुझे भुला नहीं सकता,
तेरी यादों के पन्ने मैं जला नहीं सकता,
कश्मकश ये है कि खुद को मरना होगा,
और मैं अपनी खातिर तुझे रुला नहीं सकता।

 

Dhokebaaz Shayari in Hindi

टूट जायें ख्वाब तो कोई आस क्या रखना,
पलकों के भीगने का हिसाब क्या रखना,
बस इसलिए मुस्करा देते हैं हम,
अपने दुःख से किसी को उदास क्या रखना।

 

ज़माने से सुना था कि मोहब्बत हार जाती है,
जो चाहत एक तरफ हो वो चाहत हार जाती है,
कहीं दुआ का एक लफ्ज असर कर जाता,
और कहीं बरसों की इबादत भी हार जाती है।

 

दिल अमीर था मगर मुक़द्दर गरीब था,
मिल कर बिछड़ना तो हमारा नसीब था,
हम चाह कर भी कुछ कर न सके,
घर जलता रहा और समुन्दर करीब था।

 

किसी टूटे हुए दिल की आवाज मुझे कहिये,
तार जिसके सब टूटे हो वो साज़ मुझे कहिये,
मैं कौन हूँ और किसके लिए जिंदा हूँ,
मैं खुद नहीं समझा वो राज़ मुझे कहिये।

 

कुछ तेरा काम था कुछ मेरा काम था,
तेरी गलियों में आशिक मैं बदनाम था,
इतनी शिद्दत से चाहा था तुझको सनम,
जान निकली तो तुझ पर ही इल्ज़ाम था।

 

Dhokebaaz Shayari in Hindi

दुनिया में मैं अपनी कमी छोड़ जाऊंगा,
राहों पर इंतजार की लकीर छोड़ जाऊंगा,
याद रखना एक दिन मुझे ढूढ़ते फिरोगे,
आँखों में आपके मैं नमी छोड़ जाऊंगा।

 

जुबान खामोश और आँखों में नमी होगी,
यही बस मेरी दास्ताने-ज़िंदगी होगी,
भरने को तो हर ज़ख्म भर जायेगा लेकिन,
कैसे भरेगी वो जगह जहाँ तेरी कमी होगी।

 

तमाम रात का तूफ़ान बर्क-ओ-बाद न था,
हमको ही अपने चिरागों पर ऐतमाद न था,
वो तो लहू के धब्बों से पहचान बन गई,
वर्ना मेरे घर का पता किसी को याद न था।

 

एक दिन चले जाओगे मुझे छोड़कर,
मेरी ख्वाहिशों के घर को तोड़कर,
इन्हीं बातों में उलझी हैं रातें मेरी,
कैसे रह पाऊँगा मैं तुमसे दूर होकर.

 

मुद्दत से थी किसी से मिलने की आरज़ू,
ख्वाहिश-ए-दीदार में सबकुछ लुटा दिया,
किसी ने दी खबर कि आएंगे वो रात को,
इतना किया उजाला कि घर तक जला दिया।