मां-बाप की बूढ़ी आंखों में इक फ़िक्र-सी छाई रहती है
मां-बाप की बूढ़ी आंखों में इक फ़िक्र-सी छाई रहती है
जिस कम्बल में सब सोते थे अब वो भी छोटा पड़ता है.
जिस कम्बल में सब सोते थे अब वो भी छोटा पड़ता है.
मां-बाप की बूढ़ी आंखों में इक फ़िक्र-सी छाई रहती है