0

Heart Touching Ghazal in Hindi Font । Romantic Ghazal in Hindi Font

तेरे कमाल की हद…

तेरे कमाल की हद कब कोई बशर समझा;
उसी क़दर उसे हैरत है, जिस क़दर समझा;

कभी न बन्दे-क़बा खोल कर किया आराम;
ग़रीबख़ाने को तुमने न अपना घर समझा;

पयामे-वस्ल का मज़मूँ बहुत है पेचीदा;
कई तरह इसी मतलब को नामाबर समझा;

न खुल सका तेरी बातों का एक से मतलब;
मगर समझने को अपनी-सी हर बशर समझा।

एक कतरा मलाल भी बोया नहीं गया,

वो खौफ था के लोगों से रोया नहीं गया;

यह सच है के तेरी भी नींदें उजड़ गयीं;
तुझ से बिछड़ के हम से भी सोया नहीं गया;

उस रात तू भी पहले सा अपना नहीं लगा;
उस रात खुल के मुझसे भी रोया नहीं गया;

दामन है ख़ुश्क आँख भी चुप चाप है बहुत;
लड़ियों में आंसुओं को पिरोया नहीं गया;

अलफ़ाज़ तल्ख़ बात का अंदाज़ सर्द है;
पिछला मलाल आज भी गोया नहीं गया;

अब भी कहीं कहीं पे है कालख लगी हुई;
रंजिश का दाग़ ठीक से धोया नहीं गया।

चैन मिल जाए…..

कम नहीं मेरी ज़िन्दगी के लिए;
चैन मिल जाए दो घडी के लिए;

दिले-ज़ार कौन है तेरा;
क्यों तड़पता है यूं किसी के लिए;
चैन मिल जाए…

कितने सामान कर लिए पैदा;
इतनी छोटी सी ज़िन्दगी के लिए;
चैन मिल जाए….

ऐसा फ़ैयाज़ ग़म ने घेरा है;
लब तरस ही गए हंसी के लिए;
चैन मिल जाए….

तेरी हर बात मोहब्बत में…

तेरी हर बात मोहब्बत में गंवारा करके;
दिल के बाज़ार में बैठे हैँ ख़सारा करके;

एक चिंगारी नज़र आई थी बस्ती में उसे;
वो अलग हट गया आँधी को इशारा करके;

मुन्तज़िर हूँ कि सितारों की ज़रा आँख लगे;
चाँद को छत पे बुला लूँगा इशारा करके;

मैं वो दरिया हूँ कि हर बूँद भंवर है जिसकी;
तुमने अच्छा ही किया मुझसे किनारा करके।

मंजिल …

पहर दिन सप्ताह महीने साल;
मत देखों मंजिल की चाह में;

ये देखों कि कितना चले हो;
और उसमें भी कितना भटके हो राह में;

यदि यह भटकाव कुछ कम हो जाए;
और तेजी ला दो चाल में;

तो बहुत मुमकिन है कि कामयाबी;
हांसिल हो जाए नए साल में।

भड़का रहे हैं आग…

भड़का रहे हैं आग लब-ए-नग़्मागार से हम;
ख़ामोश क्या रहेंगे ज़माने के डर से हम;

कुछ और बड़ गए अंधेरे तो क्या हुआ;
मायूस तो नहीं हैं तुलु-ए-सहर से हम;

ले दे के अपने पास फ़क़त एक नज़र तो है;
क्यों देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम

माना कि इस ज़मीं को न गुलज़ार कर सके;
कुछ ख़ार कम कर गए गुज़रे जिधर से हम।

हर एक रूह में एक ग़म छुपा लगे हैं मुझे;
ये ज़िन्दगी तो कोई बद-दुआ लगे है मुझे;

जो आँसू में कभी रात भीग जाती है;
बहुत क़रीब वो आवाज़-ए-पा लगे है मुझे;

मैं सो भी जाऊँ तो मेरी बंद आँखों में;
तमाम रात कोई झाँकता लगे है मुझे;

मैं जब भी उस के ख़यालों में खो सा जाता हूँ;
वो ख़ुद भी बात करे तो बुरा लगे है मुझे;

मैं सोचता था कि लौटूँगा अजनबी की तरह;
ये मेरा गाँव तो पहचाना सा लगे है मुझे;

बिखर गया है कुछ इस तरह आदमी का वजूद;
हर एक फ़र्द कोई सानेहा लगे है मुझे।

तस्वीर का रुख

तस्वीर का रुख एक नहीं दूसरा भी है;
खैरात जो देता है वही लूटता भी है;

ईमान को अब लेके किधर जाइयेगा आप;
बेकार है ये चीज कोई पूछता भी है;

बाज़ार चले आये वफ़ा भी, ख़ुलूस भी;
अब घर में बचा क्या है कोई सोचता भी है;

वैसे तो ज़माने के बहुत तीर खाये हैं;
पर इनमें कोई तीर है जो फूल सा भी है;

इस दिल ने भी फ़ितरत किसी बच्चे सी पाई है;
पहले जिसे खो दे उसे फिर ढूँढता भी है।

मैं खुद भी सोचता हूँ…

मैं खुद भी सोचता हूँ ये क्या मेरा हाल है;
जिसका जवाब चाहिए, वो क्या सवाल है;

घर से चला तो दिल के सिवा पास कुछ न था;
क्या मुझसे खो गया है, मुझे क्या मलाल है;

आसूदगी से दिल के सभी दाग धुल गए;
लेकिन वो कैसे जाए, जो शीशे में बल है;

बे-दस्तो-पा हू आज तो इल्जाम किसको दूँ;
कल मैंने ही बुना था, ये मेरा ही जाल है;

फिर कोई ख्वाब देखूं, कोई आरजू करूँ;
अब ऐ दिल-ए-तबाह, तेरा क्या ख्याल है।

kumarmukul598

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *